LUCKNOW / 28-03-2026

दो लाख अंग्रेज़ सैनिकों ने दो सौ वर्षों तक भारत पर शासन किया - जातिवाद से ऊपर उठो और देश की प्रगति में योगदान दो: डॉ. राजेश्वर सिंह

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मुख्य संपादक प्रवीण सैनी 

भारत की 60% आबादी युवा - सवाल पूछने के साथ युवा समाधान खोजे, भारत को सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक महाशक्ति बनाए: डॉ. राजेश्वर सिंह

युवाओं को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी याद दिलाई - पिछले 100 वर्षों में पृथ्वी का तापमान लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ा: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ आज भागीदारी भवन, लखनऊ में आयोजित युवा संसद 2026 में अपने विचार साझा करते हुए विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं की शक्ति, जिम्मेदारी और देश की प्रगति में उनकी भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने युवाओं को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से अवगत कराते हुए उन्हें जागरूक, विचारशील और एकजुट रहने का संदेश दिया।

डॉ. सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत इतिहास के उदाहरण से करते हुए बताया कि मात्र 2 लाख अंग्रेज़ सैनिकों ने 200 वर्षों तक भारत पर शासन किया, और इसका मुख्य कारण हमारी आंतरिक विभाजनकारी सोच और संकीर्ण दृष्टिकोण था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लगभग 25 लाख भारतीय सैनिकों को विदेशों में भेजा गया, जिनमें से लाखों ने अपने प्राणों की आहुति दी। यही कारण है कि देश की रक्षा और विकास की जिम्मेदारी अब हमारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है।

डॉ. सिंह ने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां लगभग 60% आबादी युवा है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल सवाल न पूछें, बल्कि समाधान भी खोजें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जातिवाद और संकीर्ण सोच युवाओं की ऊर्जा और देश की एकता को कमजोर करती है, इसलिए इसे हर स्तर पर चुनौती देना युवा कर्तव्य है।

उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी कि यदि हम एकजुट नहीं रहे, तो हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय ताकत कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि विभाजन ने हमेशा नुकसान पहुँचाया है। इसलिए हमें जाति, धर्म और क्षेत्र जैसी संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर एक सशक्त, समरस और प्रगतिशील समाज का निर्माण करना होगा।

डॉ. सिंह ने युवाओं को बताया कि आज भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे दुनिया हैरान है। वैश्विक विकास दर लगभग 3% है, जबकि भारत की विकास दर 8% के आसपास है। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था ही किसी देश की स्थिरता और सामरिक शक्ति की कुंजी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने कौशल, तकनीकी ज्ञान और क्षमता को लगातार बढ़ाएं ताकि देश की अर्थव्यवस्था में अधिकतम योगदान कर सकें।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब भारत आजाद हुआ था, तब प्रति व्यक्ति आय मात्र 500 रुपये थी, अस्पतालों की संख्या सीमित थी और मातृ मृत्यु दर उच्च थी। आज भारत में 1500 से अधिक विश्वविद्यालय हैं और बुनियादी ढांचा विश्वस्तरीय स्तर पर है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पाँच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में मदद कर रहा है।

डॉ. सिंह ने डिजिटल शिक्षा और साइबर सुरक्षा पर भी जोर दिया। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 80 स्कूल और कॉलेजों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत पर प्रतिदिन 762 साइबर हमले होते हैं, और इसके लिए युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे नई तकनीकों और नवाचार में दक्ष बनें, ताकि साइबर सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट तकनीक के क्षेत्र में देश को मजबूत किया जा सके।

डॉ. सिंह ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में पृथ्वी का तापमान लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। लखनऊ जैसे शहरों में भूमिगत जल स्तर हर वर्ष लगभग 10 फीट नीचे जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दें। साथ ही, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल युग में युवाओं को अपने स्वास्थ्य और खेल गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व कई संघर्ष और युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। चाहे मध्य-पूर्व हो, रूस-यूक्रेन संघर्ष हो या अफ्रीका, हर जगह आर्थिक और सैन्य शक्ति ही स्थिरता की कुंजी है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि भारत को सैन्य महाशक्ति बनाने के लिए भी युवा पीढ़ी को जागरूक, प्रशिक्षित और सक्षम रहना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं का कर्तव्य है कि वे केवल समस्याओं को न देखें, बल्कि समाधान भी खोजें। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने इस देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और अपने प्राणों की आहुति दी। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश को सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में विकसित करें।

इस अवसर पर युवा संसद के संरक्षक राजकुमार पटेल, आयोजक अभिनव पटेल, प्रो. केडी सिंह, संचालक सौरभ पटेल, सोमेंद्र सिंह, शिखर पुरी, धीरेंद्र सिंह, मृणाली दीक्षित, उत्कर्ष चौहान, दीपांशु वर्मा और सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और युवा मुद्दों पर विचार विमर्श किया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का धन्यवाद करते हुए युवा पीढ़ी से अपील की, "आइए हम संकल्प लें – हम एकजुट रहेंगे, जागरूक रहेंगे और भारत को विश्व की सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने में अपना पूर्ण योगदान देंगे। जय हिंद, जय भारत।

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