LUCKNOW / 04-02-2026

अवैध घुसपैठियों को मतदाता बनाने की साज़िश बेनकाब—कांग्रेस और सपा पर डॉ. राजेश्वर सिंह का तीखा प्रहार

Share this page:

Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Telegram Pinterest Email



प्रदेश जनहित खबर पोर्टल यूट्यूब चैनल लखनऊ रायबरेली 

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ 

संविधान बनाम तुष्टिकरण की राजनीति एस आई आर हार्दिकR मुद्दे पर कांग्रेस–सपा की असली मंशा उजागर: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। लोकतंत्र की जड़ों पर जब भी प्रहार होता है, तब-तब राष्ट्र को सच के साथ खड़े नेतृत्व की आवश्यकता होती है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) जैसे संवैधानिक विषय पर अपनाया गया रुख एक बार फिर उजागर करता है कि इन दलों के लिए राष्ट्रहित नहीं, बल्कि संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति सर्वोपरि है।

बुधवार को सोशल मीडिया के माध्यम से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की चुप्पी—और कई मामलों में परोक्ष समर्थन—को किसी भी दृष्टि से अनजाने में की गई भूल नहीं कहा जा सकता। यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठियों को मतदाता में परिवर्तित कर सत्ता की राजनीति को साधना है। किसी भी संप्रभु, लोकतांत्रिक और आत्मसम्मान से भरे राष्ट्र के लिए यह रवैया पूरी तरह अस्वीकार्य और खतरनाक है।

डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची लोकतंत्र की पवित्र आधारशिला है, कोई राजनीतिक हथियार नहीं। विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) एक संवैधानिक, आवश्यक और अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और प्रमाणिक भारतीय नागरिक ही देश के भविष्य का निर्धारण करें—अवैध घुसपैठिये नहीं। प्रत्येक राष्ट्रवादी नागरिक का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि वह लोकतंत्र की इस पवित्र प्रक्रिया की रक्षा करे।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और जनसांख्यिकीय अखंडता जैसे गंभीर विषयों पर स्पष्ट और साहसिक रुख अपनाने के बजाय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की अंधी दौड़ में शामिल हैं। मज़ारों और दरगाहों पर राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई जाती है, लेकिन राम मंदिर—जो भारत की सभ्यतागत चेतना, लोकतांत्रिक संघर्ष और संवैधानिक समाधान का प्रतीक है—वहाँ न समय है, न सम्मान और न ही इच्छाशक्ति।

यह धर्मनिरपेक्षता नहीं है। यह सुनियोजित, अवसरवादी और आपराधिक तुष्टिकरण है। अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए विधायक ने कहा कि आज देश को ऐसी राजनीति की आवश्यकता है जो राष्ट्रवाद, संविधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के मूल्यों पर आधारित हो—न कि ऐसी राजनीति जो क्षणिक चुनावी लाभ के लिए लोकतंत्र की पवित्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय हित को गिरवी रख दे।

देश के सामने विकल्प अब पूरी तरह स्पष्ट है। राष्ट्र पहले, या अवैध वोट-बैंक पहले।

Tranding

© PRADESH JANHIT KHABAR. All Rights Reserved.